भोपाल, 12 सितंबर 2025।
कभी गाँव की चौपाल तक सीमित रहने वाली महिलाएँ आज कारोबार और उद्यमिता की दुनिया में कदम रख रही हैं। उनके सपनों को उड़ान देने का श्रेय जाता है स्वयंश्री कार्यक्रम को, जिसने अब तक मध्य प्रदेश की 3.8 लाख से अधिक महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में सशक्त किया है।
यह कार्यक्रम वर्ष 2023 में रिलायंस फाउंडेशन और गेट्स फाउंडेशन द्वारा मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (MPSRLM) के सहयोग से शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं की आय को बढ़ाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और पारिवारिक व सामाजिक स्तर पर उनका दर्जा मज़बूत करना है।

भोपाल में सम्मेलन, साझा हुई सफलता की कहानियाँ
राजधानी भोपाल में आयोजित स्वयंश्री सम्मेलन इस दिशा में एक अहम पड़ाव साबित हुआ। यहाँ नीति निर्माताओं, सामाजिक संस्थाओं, उद्योग जगत और महिला समूहों के प्रतिनिधि एक मंच पर आए और महिलाओं की आजीविका को मज़बूत बनाने के उपायों पर चर्चा की।
इस अवसर पर ‘महिलाओं की आजीविका को मज़बूत बनाने के लिए मध्य प्रदेश की सर्वोत्तम प्रथाएँ’ नामक संग्रह भी जारी किया गया। इसमें स्वयंश्री कार्यक्रम से उभरे बारह प्रमुख उद्यमों की कहानियाँ शामिल हैं। उदाहरण के लिए, कहीं महिलाएँ मशरूम उत्पादन से सालाना लाखों कमा रही हैं, तो कहीं हस्तशिल्प और डेयरी उत्पादों से गाँव की अर्थव्यवस्था बदल रही है।
“सीमाओं से आगे बढ़कर नए सपने”
MPSRLM की सीईओ सुश्री हर्षिका सिंह (आईएएस) ने सम्मेलन में कहा,
“स्वयंश्री कार्यक्रम ने महिलाओं को पारंपरिक सीमाओं से आगे बढ़कर नए सपने देखने की प्रेरणा दी है। आज स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लाखों महिलाएँ अपनी आय बढ़ाने में लगी हैं और यह मॉडल जिले व राज्य स्तर पर भी अपनाया जा सकता है।”
निजी क्षेत्र और सामाजिक संस्थाओं की साझेदारी
रिलायंस फाउंडेशन की महिला सशक्तिकरण प्रमुख सुश्री एन. दीप्ति रेड्डी ने बताया कि संगठन का लक्ष्य ग्रामीण महिलाओं को उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ाकर उनकी वार्षिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि करना है।
वहीं, गेट्स फाउंडेशन के निदेशक अलकेश वाधवानी ने कहा कि प्रधानमंत्री के ‘लखपति दीदी’ विज़न से प्रेरित यह कार्यक्रम महिलाओं के लिए स्थायी आय के अवसर तैयार कर रहा है। उनके अनुसार,
“जब सरकार, निजी क्षेत्र और सामाजिक संगठन मिलकर काम करते हैं, तभी बड़े पैमाने पर बदलाव संभव होता है।”
ग्रामीण बदलाव की नई तस्वीर
स्वयंश्री कार्यक्रम केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि ग्रामीण समाज में बदलाव का एक आंदोलन भी बन गया है।
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गुना जिले की सावित्री बाई, जो पहले खेत मज़दूरी करती थीं, आज मशरूम यूनिट चला रही हैं और सालाना एक लाख रुपये से अधिक की आय कमा रही हैं।
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बालाघाट की महिलाओं ने लघु वनोपज आधारित उद्यम शुरू कर अपनी कमाई को दोगुना कर लिया है।
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वहीं झाबुआ की बुनकर महिलाएँ अपने उत्पाद अब ऑनलाइन बेच रही हैं और शहरों के बाजार तक पहुँची हैं।
ये उदाहरण बताते हैं कि ग्रामीण महिलाएँ अब केवल परिवार की ज़िम्मेदारी निभाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आर्थिक प्रगति की धुरी बन रही हैं।
लक्ष्य: 10 लाख महिलाएँ, सालाना एक लाख आय
स्वयंश्री कार्यक्रम का लक्ष्य मध्य प्रदेश, गुजरात और ओडिशा की 10 लाख महिलाओं तक पहुँचना है। इसके तहत महिलाओं की घरेलू आय को कम से कम एक लाख रुपये वार्षिक तक पहुँचाने की योजना है।
MPSRLM जैसी संस्थाएँ गाँव-गाँव जाकर स्वयं सहायता समूह (SHGs) बना रही हैं और महिलाओं को प्रशिक्षण, ऋण, विपणन और नेटवर्किंग की सुविधाएँ दे रही हैं।
सशक्तिकरण की राह पर महिलाएँ
आजादी के अमृतकाल में जब भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का सपना देख रहा है, तब ग्रामीण महिलाओं का यह आर्थिक सशक्तिकरण उस दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।
स्वयंश्री कार्यक्रम यह साबित करता है कि जब महिलाओं को अवसर और संसाधन मिलते हैं, तो वे न सिर्फ़ अपने परिवार, बल्कि पूरे गाँव और समाज की तस्वीर बदल सकती हैं।
