विवेक झा, भोपाल। टेक्स लॉ बार एसोसिएशन द्वारा आज अपने सदस्यों के लिए जीएसटी विषय पर एक महत्वपूर्ण सेमिनार का आयोजन किया गया। इस सेमिनार में मानस रंजन मोहंती, जो सीजीएसटी के मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के मुख्य आयुक्त हैं, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वहीं फरीदाबाद से आए जाने-माने कर विशेषज्ञ राजेश खंडेलवाल तथा भोपाल के वरिष्ठ सीए नवनीत गर्ग ने बतौर वक्ता सेमिनार में व्यावहारिक और तकनीकी जानकारियां साझा कीं।

व्यापारी और विभाग को जोड़ने वाला सेतु है कर सलाहकार
मुख्य आयुक्त मानस रंजन मोहंती ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी टैक्स सिस्टम में विभाग, कर सलाहकार और व्यापारी—ये तीनों स्तंभ समान रूप से महत्वपूर्ण होते हैं। उन्होंने कहा कि कर सलाहकार इन तीनों के बीच एक मजबूत कड़ी का काम करते हैं। कर सलाहकारों की सक्रिय और सकारात्मक भूमिका से न केवल व्यापारी सही दिशा में कार्य कर पाते हैं, बल्कि विभाग को भी अपने राजस्व लक्ष्यों की पूर्ति करने में आसानी होती है। उन्होंने कर सलाहकारों से अपील की कि वे कर अनुपालन के साथ-साथ टैक्सपेयर्स में जागरूकता भी बढ़ाएं।
फॉर्म-9 और 9C में बड़े बदलाव, गलती पर पड़ेगा भारी जुर्माना
सेमिनार में सीए नवनीत गर्ग ने वर्ष 2024-25 की जीएसटी वार्षिक विवरणी फॉर्म-9 एवं 9C को भरने में आने वाली व्यावहारिक समस्याओं और सावधानियों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष विभाग द्वारा फॉर्म में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जिनका सही तरीके से पालन करना अत्यंत आवश्यक है। यदि इन बदलावों की अनदेखी की गई, तो संबंधित करदाताओं को नोटिस और पेनल्टी का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने उपस्थित कर सलाहकारों को रिटर्न भरते समय मिलान (रिकॉन्सिलिएशन), इनपुट टैक्स क्रेडिट और टर्नओवर डिक्लेरेशन पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी।

ई-वे बिल की मानवीय गलती पर पेनल्टी अवैध
वहीं फरीदाबाद से आए सीए राजेश खंडेलवाल ने ई-वे बिल में होने वाली त्रुटियों पर लगने वाली पेनल्टी के विषय में कई महत्वपूर्ण कानूनी पहलुओं को सामने रखा। उन्होंने बताया कि कई मामलों में विभाग द्वारा लगाई जाने वाली शास्ति सही नहीं होती, क्योंकि कई उच्च न्यायालयों ने मानवीय भूल पर पेनल्टी को अनुचित ठहराया है। उन्होंने यह भी कहा कि व्यापारी और कर सलाहकार यदि समय पर इन मामलों में सही कानूनी कदम उठाएं, तो राहत मिल सकती है।
उन्होंने धारा 73 एवं 74 के अंतर्गत लगाई जाने वाली पेनल्टी पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा जारी किए जाने वाले अधिकांश नोटिस गलत धारा में जारी कर दिए जाते हैं, जिसका असर बाद में अपील की प्रक्रिया पर पड़ता है। उन्होंने कर सलाहकारों से आग्रह किया कि वे इन मामलों में अपील के दौरान सही धाराओं के मुद्दे को अवश्य उठाएं, जिससे संबंधित करदाता को न्याय मिल सके।
कार्यक्रम के दौरान संगठन के पदाधिकारियों ने अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर संस्था के अध्यक्ष मृदुल आर्य, उपाध्यक्ष अंकुर अग्रवाल, सदस्य बच्चन आचार्य, सचिव मनोज पारख, कोषाध्यक्ष धीरज अग्रवाल, सहसचिव संदीप चौहान तथा वरिष्ठ सदस्य दीपक गोयल, राजेश्वर दयाल, भूपेश खुरपिया, नरेश बालानी सहित बड़ी संख्या में कर सलाहकार एवं अधिवक्ता उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में सभी वक्ताओं ने प्रतिभागियों के प्रश्नों के उत्तर दिए और जीएसटी से जुड़ी व्यावहारिक जटिलताओं का समाधान भी बताया। सेमिनार को लेकर उपस्थित सदस्यों में विशेष उत्साह देखने को मिला और इसे जीएसटी के क्षेत्र में अपनी जानकारी को अपडेट करने का एक उपयोगी मंच बताया गया।
