चार श्रम संहिताओं की वापसी तक चरणबद्ध आंदोलन तेज़ करने का फैसला
विवेक झा, भोपाल, 9 दिसंबर 2025।
केंद्रीय ट्रेड यूनियनों (CTUs) और सेक्टरल फेडरेशनों/एसोसिएशनों के संयुक्त मंच ने चारों श्रम संहिताओं को वापस लेने तक चरणबद्ध और व्यापक संघर्ष का ऐलान किया है। आज जारी प्रेस विज्ञप्ति में संयुक्त मंच ने फरवरी 2026 में देशव्यापी आम हड़ताल करने का निर्णय घोषित किया। हड़ताल की सटीक तिथि 22 दिसंबर 2025 को होने वाली अगली बैठक में तय की जाएगी।
ट्रेड यूनियनों ने 26 नवंबर को देशभर में हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों को ऐतिहासिक बताते हुए श्रमिक वर्ग को धन्यवाद दिया और कहा कि श्रम संहिताओं के खिलाफ यह स्वतःस्फूर्त जनआक्रोश सरकार और कॉरपोरेट घरानों के “झूठे प्रचार अभियान” की पोल खोलता है।
श्रमिक वर्ग से अभूतपूर्व भागीदारी—ग़ैर-संगठित और BMS से जुड़े श्रमिक भी शामिल
संयुक्त मंच INTUC, AITUC, HMS, CITU, AIUTUC, TUCC, AICCTU, LPF, UTUC ने कहा कि जिन श्रम संहिताओं को पिछले पाँच वर्षों तक लागू न कर पाने की वजह मज़दूर आंदोलन का कड़ा प्रतिरोध रहा था, उनकी अधिसूचना के बाद पूरे देश में व्यापक असंतोष देखने को मिला।
कार्यस्थलों पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए तथा कई जगह संहिताओं की प्रतियां जलाकर विरोध दर्ज कराया गया।
यह भी उल्लेखनीय रहा कि इस विरोध में न केवल संगठित बल्कि बड़ी संख्या में ग़ैर-संगठित श्रमिक तथा BMS से जुड़े कर्मचारी भी शामिल हुए। पत्रकार संगठनों ने भी इन संहिताओं के विरोध में स्पष्ट नाराज़गी व्यक्त की।
किसान संगठनों और युवा वर्ग के समर्थन ने बढ़ाई आवाज़
26 नवंबर को ज़िला मुख्यालयों, खंड स्तर और कार्यस्थलों पर हुई बड़ी जुटानों में संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) की सक्रिय भागीदारी रही।
SKM ने MSP, कर्ज़माफी, बीज विधेयक और बिजली संशोधन विधेयक 2025 के खिलाफ अपने संघर्ष के साथ-साथ श्रम संहिताओं के विरोध को भी मजबूत समर्थन दिया।
विरोध प्रदर्शनों में छात्रों और युवाओं की भारी भागीदारी को संयुक्त मंच ने “देश के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता का संकेत” बताया।
सरकार के ‘फायदे बताने’ वाले प्रचार को बताया दिग्भ्रमित करने वाला
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सरकार और कॉरपोरेट मीडिया द्वारा श्रम संहिताओं के तथाकथित लाभ बताने के लिए चालाए जा रहे बड़े विज्ञापन अभियान, पेड न्यूज़ और पक्षपातपूर्ण लेख दर्शाते हैं कि “शासक वर्ग घबराहट में है”।
CTUs ने कहा कि श्रम विभागों और अदालतों में भी इन संहिताओं की जटिलताओं के चलते अफरा-तफरी की स्थिति है।
विपक्षी दल पहली बार एक मंच पर—संहिताओं की वापसी की मांग
ट्रेड यूनियनों ने इस तथ्य का स्वागत किया कि पहली बार सभी प्रमुख विपक्षी दल संसद के अंदर और बाहर श्रम संहिताओं की पूरी तरह वापसी की मांग पर एकजुट दिखे।
CTUs को उम्मीद है कि यह समर्थन संहिताओं के निरस्तीकरण तक जारी रहेगा।
इंडिगो विवाद पर चिंता—निजीकरण पर पुनर्विचार की मांग
संयुक्त मंच ने इंडिगो एयरलाइंस से जुड़े हालिया घटनाक्रम पर गंभीर चिंता जताई, जिसके कारण लाखों यात्री प्रभावित हुए।
मंच ने कहा कि यह घटना कॉरपोरेट अहंकार तथा श्रमिकों और यात्रियों की सुरक्षा की उपेक्षा का परिणाम है, जो रणनीतिक क्षेत्रों में निजीकरण और एकाधिकार के खतरों की ओर इशारा करती है।
CTUs ने इस मामले की न्यायिक जांच, दोषियों पर कठोर कार्रवाई और प्रभावित लोगों के लिए उचित मुआवज़े की मांग की।
इसके साथ ही सरकार को बिजली, पेट्रोलियम, रेलवे, रक्षा, दूरसंचार और बैंकिंग जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में तेजी से किए जा रहे निजीकरण को रोकने की सलाह दी।
फरवरी 2026 में देशव्यापी हड़ताल—राज्य स्तर पर बड़े अभियान शुरू होंगे
वी. के. शर्मा, महासचिव, मध्य प्रदेश बैंक एम्प्लाईज एसोसिएशन तथा प्रवक्ता, ट्रेड यूनियनों का संयुक्त मोर्चा मध्य प्रदेश ने बताया कि संयुक्त ट्रेड यूनियन मंच ने घोषणा की कि अब देशभर में चरणबद्ध तरीके से संघर्ष तेज़ किया जाएगा।
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कार्यस्थल, ज़िला और राज्य स्तर पर विरोध कार्यक्रम आयोजित होंगे।
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सभी राज्य अध्याय एक सप्ताह के भीतर बैठक कर विस्तृत आंदोलन रणनीति—जथों, रैलियों, बड़े जुटानों और घर-घर अभियान—की रूपरेखा बनाएंगे।
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ये गतिविधियाँ अंततः प्रत्यक्ष कार्रवाई के रूप में आम हड़ताल की ओर ले जाएंगी।
CTUs ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक श्रम संहिताओं को पूरी तरह वापस नहीं ले लिया जाता।
युवाओं, छात्रों और विपक्षी दलों से समर्थन की अपील
संयुक्त मंच ने कहा कि यह संघर्ष केवल मजदूरों का नहीं बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे और बुनियादी अधिकारों की रक्षा का संघर्ष है।
इसी के चलते उन्होंने छात्रों, युवाओं, आम नागरिकों और सभी राजनीतिक दलों से इसमें एकजुटता दिखाने की अपील की।
