विवेक झा, भोपाल। सरकार की लगातार अनदेखी और वादा-खिलाफी के खिलाफ बैंक कर्मियों का गुस्सा अब सड़कों पर खुलकर फूट पड़ा है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर सोमवार को राजधानी भोपाल में सैकड़ों बैंक कर्मचारी-अधिकारी “पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करो” की मांग को लेकर दोपहर 11:30 बजे से 2:30 बजे तक पंजाब नेशनल बैंक, इंदिरा प्रेस कॉम्प्लेक्स के सामने धरने पर बैठे। धरने के बाद इंकलाबी नारेबाजी के साथ जोरदार प्रदर्शन किया गया और सरकार को अंतिम चेतावनी दी गई।
सभा को संबोधित करते हुए बैंक यूनियन नेताओं ने कहा कि पांच दिवसीय बैंकिंग अब कोई सुविधा या विलासिता नहीं, बल्कि मानवीय आवश्यकता और अधिकार बन चुकी है। इसके बावजूद सरकार जानबूझकर इस पर फैसला टाल रही है, जो सीधे-सीधे बैंक कर्मचारियों के शोषण के समान है।

काम का बोझ, स्टाफ की कमी और मानसिक उत्पीड़न
वक्ताओं ने कहा कि बैंक कर्मचारी आज अत्यधिक कार्यभार, अव्यावहारिक टारगेट, स्टाफ की भारी कमी और लगातार बढ़ते मानसिक दबाव के बीच काम करने को मजबूर हैं। सप्ताह में छह दिन काम की व्यवस्था ने कर्मचारियों का कार्य–जीवन संतुलन पूरी तरह तोड़ दिया है, जिसका असर न सिर्फ उनके स्वास्थ्य पर, बल्कि बैंकिंग सेवाओं की गुणवत्ता पर भी पड़ रहा है।
यूनियन नेताओं ने सवाल उठाया कि जब लगभग सभी सरकारी विभागों, बीमा क्षेत्र, आरबीआई और अन्य वित्तीय संस्थानों में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू है, तो सिर्फ बैंक कर्मचारियों के साथ यह भेदभाव क्यों।

डिजिटल युग में बहानेबाज़ी बंद करे सरकार
सभा में साफ कहा गया कि पांच दिवसीय बैंकिंग से ग्राहकों की सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। डिजिटल बैंकिंग, एटीएम, मोबाइल और इंटरनेट बैंकिंग 24 घंटे उपलब्ध हैं।
वक्ताओं ने कहा—
“थका हुआ और मानसिक रूप से दबा कर्मचारी अच्छी सेवा नहीं दे सकता। सरकार यदि सच में ‘ग्राहक सेवा’ की बात करती है, तो पहले कर्मचारियों की हालत सुधारे।”

कोरोना में जान जोखिम में, आज हक़ के लिए सड़कों पर
वक्ताओं ने याद दिलाया कि कोरोना महामारी के दौरान बैंक कर्मचारियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर काम किया, सरकार की हर योजना को ज़मीन पर उतारा, फिर भी आज उनकी जायज़ मांगों को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय बैंक संघ और केंद्र सरकार द्वारा पूर्व में दी गई सैद्धांतिक सहमति के बावजूद पांच दिवसीय बैंकिंग लागू न करना खुली वादा-खिलाफी है।

27 जनवरी को देश थमेगा—राष्ट्रव्यापी हड़ताल का एलान
UFBU ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि यदि सरकार ने तत्काल निर्णय नहीं लिया, तो 27 जनवरी 2026 को देशभर के सभी बैंकों के लगभग 10 लाख बैंक कर्मचारी-अधिकारी राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर जाएंगे।
वक्ताओं ने कहा कि यह आंदोलन अब पीछे नहीं हटेगा—
“या तो सरकार फैसला ले, या फिर पूरे देश की बैंकिंग व्यवस्था ठप होने के लिए तैयार रहे।”
इन नेताओं ने सरकार को घेरा
सभा को वी के शर्मा, संजीव मिश्रा, प्रवीण मेघानी, दीपक रत्न शर्मा, सुबिन सिन्हा, संजय कुदेशिया, विशाल धमेजा, निर्भय सिंह ठाकुर, भगवान स्वरूप कुशवाहा, सुनील सिंह, वी एस नेगी, नजीर कुरैशी, अनिल कुमार श्रीवास्तव, पंकज ठाकुर, जे पी झवर, गुणशेखरन, जे पी दुबे, देवेंद्र खरे, दीपक नायर, राजीव उपाध्याय, महेंद्र गुप्ता, अमित गुप्ता, प्रभात खरे, सत्येंद्र चौरसिया, वासुदेव जेठानी, सिद्धार्थ सिंह, टी एन विन्डैया, वैभव गुप्ता, के वासुदेव सिंह, मनीष भार्गव, जी डी पाराशर, हरीश अग्रवाल, विजय चोइथानी, मनोज गढ़वाल, देवानंद जेठानी, हरीश शर्मा, मोहन रायकवार,मनासय, अरविंद, शुभम तिवारी, राजेश खड़का, विष्णु प्रसाद शर्मा,श्याम रेनवाल,अविनाश धमेजा,उमेश शाक्य, सुदेश कल्याणे, जीत सिंह नागर , हरीश छुगानी, मोहन कल्याणे, रजनीश पौराणिक, पुष्कर पांडे, मनीष चतुर्वेदी,सुरेश राजपूत, रजनीश शिंदे, सतीश चौबे, करण कीर, जितेंद्र लिखर “जीतू”, महेश जिज्ञासी, एम श्याम कुमार, एस पाठक सहित अनेक पदाधिकारियों ने संबोधित किया। बड़ी संख्या में बैंक कर्मचारी-अधिकारी धरना व प्रदर्शन में शामिल रहे।
स्पष्ट संदेश
पांच दिवसीय बैंकिंग हमारा अधिकार है।
अब फैसला सरकार को करना है—
संवेदनशीलता या संघर्ष।
