सुरों से सजी भावनाओं की महफ़िल—‘सुर संदेश’ की संगीतमय संध्या ने भोपाल को किया मंत्रमुग्ध

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भोपाल। संगीत जब दिल से निकलता है, तो वह सिर्फ़ सुनाई नहीं देता—महसूस भी होता है। ऐसा ही भावनात्मक और सुरमई अनुभव राजधानी भोपाल में सुर संदेश कराओके म्यूजिकल ग्रुप द्वारा आयोजित ‘सुरमई गीतों की महफ़िल’ में देखने को मिला। इस संगीतमय संध्या ने यह साबित कर दिया कि संगीत किसी प्रतियोगिता का माध्यम नहीं, बल्कि सहयोग, सृजन और आपसी अपनत्व का उत्सव है।

कार्यक्रम का आयोजन शहर के प्रतिष्ठित फूडक्राफ्ट रेस्टोरेंट में किया गया, जहां दीप प्रज्वलन से लेकर अंतिम सुर तक मंच पर भावनाओं, मेहनत और समर्पण की सुंदर झलक देखने को मिली। कार्यक्रम का शुभारंभ आयोजक, टीम और सभी गायक–गायिकाओं द्वारा श्री गणेश एवं माँ सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात गणेश वंदना और सरस्वती वंदना से संगीतमय यात्रा की शुरुआत की गई।

हर सुर में जज़्बा, हर ताल में अपनापन

मंच पर प्रस्तुत हर गीत में कलाकारों की साधना और लगन साफ झलकी। श्री आदेश जी, जुगादे जी, अभिताभ जी, अविनाश जी, अमित जी, रवि मालवीय जी, मनीष जी, राजपूत जी, मुकेश चौधरी जी, मुकेश बाहर जी, समीर काले जी, श्रोती जी, रविशंकर जी, मनोज जी, अभिजित जी, पिल्लई सर जी, राजेश जी, माईका मौरख जी, रणदिवे जी, प्रकाश जी, अतुल श्री, श्रीमती शशिकला जी, साथी जी, सुमन जी, नंदा जी, ममताजी, सुगंधा जी, सुनीता जी, वसुंधरा जी, साधना जी, संध्या जी, मीना जी, रामजी, सुनंदा जी, साक्षी जी सहित अनेक कलाकारों ने एक से बढ़कर एक सुरीली प्रस्तुतियाँ दीं।

विशेष आकर्षण के रूप में आकाशवाणी मंच की कलाकार शिवांगी पवार ताई कारा की प्रस्तुति ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरे कार्यक्रम के दौरान कलाकारों ने एक-दूसरे का उत्साह बढ़ाया और यह संदेश दिया कि संगीत प्रतिस्पर्धा नहीं, साझेदारी है

आयोजक संदेश सुले का प्रेरक प्रयास

कार्यक्रम के आयोजक श्री संदेश सुले का यह प्रयास केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि उन सपनों के लिए प्रेरणा बना, जिन्हें सुरों का साथ मिल जाए तो वे भी गीत बन जाते हैं। समापन अवसर पर संदेश घुसे ने स्वयं मंच पर आकर लोकप्रिय गीत ‘मैं ज़रा जमला पगला…’ गाकर माहौल को उल्लास से भर दिया, जिस पर कलाकारों और दर्शकों ने मंच पर आकर जमकर तालियाँ और नृत्य किया।

प्रतिभाओं का सम्मान

कार्यक्रम के अंत में श्री अनुम जी एवं रणदिवे जी की उपस्थिति में 20 गायक–गायिकाओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। यह सम्मान कलाकारों के उत्साह और भविष्य की रचनात्मक यात्रा के लिए प्रेरक साबित हुआ।

संगीत से बना परिवार

‘सुर संदेश’ की यह संगीतमय संध्या इस बात की मिसाल बनी कि जब मंच पर दिल मिलते हैं, तो हर कलाकार परिवार का हिस्सा बन जाता है। भोपाल के संगीत प्रेमियों के लिए यह शाम सुरों, संवेदनाओं और सौहार्द की यादगार सौगात बनकर रही।

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