नई दिल्ली.
भारत में सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल और बच्चों में बढ़ती डिजिटल लत को लेकर सरकार अब उम्र के आधार पर नियम बनाने पर विचार कर सकती है. देश के चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन ने अपनी सलाह में कहा है कि बच्चों और कम उम्र के यूजर्स के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक एक्सेस सीमित करना जरूरी हो सकता है.
इकोनॉमिक सर्वे में चेतावनी दी गई है कि कम उम्र के यूजर्स सोशल मीडिया के बहुत ज्यादा इस्तेमाल और हानिकारक कंटेंट के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं. ऐसे में उम्र आधारित एक्सेस लिमिट पर पॉलिसी बनाई जा सकती है. इसके साथ ही सोशल मीडिया कंपनियों को एज वेरिफिकेशन और उम्र के हिसाब से सुरक्षित डिफॉल्ट सेटिंग लागू करने की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए.
सोशल मीडिया पर बच्चों की एंट्री सीमित हो
सीईए ने परिवारों को भी भूमिका निभाने की बात कही है. उन्होंने स्क्रीन टाइम की सीमा तय करने, कुछ घंटों को डिवाइस-फ्री रखने और बच्चों के साथ ऑफलाइन गतिविधियों को बढ़ावा देने की सिफारिश की है.
सोशल मीडिया कंपनियों के लिए बड़ा बाजार है भारत
भारत इस समय सोशल मीडिया कंपनियों के लिए एक बड़ा बाजार है. देश में करीब 75 करोड़ स्मार्टफोन और लगभग 1 अरब इंटरनेट यूजर्स हैं. हालांकि, अभी सोशल मीडिया इस्तेमाल के लिए कोई एक समान मिनिमम एज लिमिट तय नहीं है. दुनिया के कई देश इस दिशा में कदम उठा चुके हैं. ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाई है. फ्रांस 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए बैन की तैयारी में है, जबकि ब्रिटेन, डेनमार्क और ग्रीस भी इस मुद्दे पर विचार कर रहे हैं.
इकोनॉमिक सर्वे में बच्चों की डिजिटल लत पर चिंता
इकोनॉमिक सर्वे में यह भी बताया गया कि स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले युवाओं में आधे से ज्यादा डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल पढ़ाई के लिए करते हैं, जबकि करीब 75 फीसदी सोशल मीडिया के लिए. रिपोर्ट के मुताबिक डिजिटल लत पढ़ाई, कामकाज की प्रोडक्टिविटी, नींद और एकाग्रता पर निगेटिव असर डालती है.
CEA की सिफारिशें सरकार पर बाध्यकारी नहीं
हालांकि मुख्य आर्थिक सलाहकार की सिफारिशें सरकार पर बाध्यकारी नहीं होतीं, लेकिन आमतौर पर पॉलिसी मेकिंग में इन्हें गंभीरता से लिया जाता है, इस बीच गोवा और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों ने भी बच्चों के स्क्रीन टाइम और सोशल मीडिया रेगुलेशन पर स्टडी शुरू कर दिया है.
