भोपाल।
सराफा व्यापारियों के समक्ष भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 411/412 के तहत होने वाली पुलिस कार्रवाई आज सबसे बड़ी समस्या और डर का कारण बन चुकी है। इस कानून के अंतर्गत यदि कोई व्यापारी अनजाने में चोरी का सोना या चांदी खरीद लेता है, तो उसे भी आरोपी मानते हुए कानूनी कार्रवाई की जाती है। इस गंभीर मुद्दे को राज्य से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक उठाने की घोषणा भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के त्रैवार्षिक चुनाव में प्रगतिशील पैनल का नेतृत्व कर रहे अध्यक्ष पद के प्रत्याशी तेजकुलपाल सिंह पाली ने की है।
पाली ने कहा कि चुनावी जनसंपर्क के दौरान सराफा चौक के व्यापारियों ने उन्हें बताया कि धारा 411/412 के कारण ईमानदार व्यापारियों को भी अपराधी की तरह प्रताड़ित किया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कानून व्यापारी हितों के खिलाफ है और इसका दुरुपयोग अक्सर प्रशासनिक स्तर पर होता है। पाली ने आश्वस्त किया कि वे और उनका पूरा पैनल सराफा व्यापारियों के साथ एकजुट होकर इस समस्या के समाधान के लिए संघर्ष करेंगे और भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री तथा कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के माध्यम से इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाया जाएगा।
पाली ने कहा कि वर्तमान स्थिति में व्यापारी पूरी ईमानदारी से आभूषण खरीदता है, लेकिन बाद में यदि वह माल चोरी का निकले तो उसे भी अपराधी मान लिया जाता है, जो न्यायसंगत नहीं है। सराफा संगठनों की लंबे समय से मांग रही है कि धारा 411/412 में संशोधन किया जाए, ताकि जानबूझकर अपराध करने वालों और अनजाने में लेनदेन करने वाले ईमानदार व्यापारियों में स्पष्ट अंतर किया जा सके।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल चोरी की संपत्ति का कब्जा होना ही धारा 411 के अंतर्गत अपराध नहीं माना जा सकता, जब तक यह सिद्ध न हो कि संबंधित व्यक्ति को यह जानकारी थी कि वह संपत्ति चोरी की है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर व्यापारियों को लगातार परेशान किया जा रहा है।

“अनियमितताओं के खिलाफ खड़ा होना अपराध नहीं”
इसी क्रम में तेजकुलपाल सिंह पाली ने अपने पूर्व इस्तीफे को लेकर उठ रहे सवालों पर भी स्पष्ट रुख रखा। उन्होंने कहा कि वार्षिक साधारण सभा में उन्होंने चेंबर चुनाव की घोषणा की थी और पारदर्शी चुनाव संपन्न कराने के लिए प्रक्रिया शुरू की थी। लेकिन कुछ लोगों ने उनके इस उद्देश्य को प्रभावित करने के लिए षड्यंत्र रचे और नियम-नीतियों में अनैतिक बदलाव कराने का दबाव बनाया।
पाली ने कहा कि ऐसे हालात में गलत का साथ देने के बजाय उन्होंने इस्तीफा देना उचित समझा और सभी तथ्यों को व्यापारियों के समक्ष रखा। उन्होंने दो टूक कहा—“यदि षड्यंत्र और अनियमितताओं के खिलाफ खड़ा रहना अपराध है, तो इसका निर्णय व्यापारी स्वयं करेंगे।” पाली ने विश्वास जताया कि ईमानदारी और सिद्धांतों पर लिया गया उनका निर्णय व्यापारियों का विश्वास और आशीर्वाद अवश्य प्राप्त करेगा।
प्रगतिशील पैनल ने दोहराया कि उनका उद्देश्य राजनीति नहीं, बल्कि व्यापारियों की सुरक्षा, सम्मान और न्याय है, और सराफा व्यापारियों की इस ज्वलंत समस्या के समाधान के लिए वे हर स्तर पर संघर्ष करेंगे।
