बच्चों के बजट में बढ़ोतरी, लेकिन प्राथमिकता अब भी सीमितः पूजा मारवाह

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भोपाल। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बच्चों के लिए बड़े पैमाने पर काम करने वाली संस्था चाइल्ड राइट्स एंड यू (क्राई) की सीईओ पूजा मारवाह ने बच्चों के समावेशी और टिकाऊ विकास के नजरिए से केन्द्रीय बजट 2026-27 के प्रावधानों का महत्वपूर्ण विश्लेषण किया है। विश्लेषण में उनका मत है कि बजट 2026–27 में बच्चों के लिए आवंटन में मामूली, लेकिन उल्लेखनीय बढ़ोतरी दिखती है, जो किसी बड़े बदलाव के बजाय सीमित और क्रमिक प्रगति का संकेत देती है। चाइल्ड राइट्स एंड यू – क्राई द्वारा किए गए ‘बच्चों के कल्याण के लिए आवंटन’ पर व्यय बजट विवरण संख्या 12 के त्वरित विश्लेषण के अनुसार, 2026–27 (बजट अनुमान) में बच्चों से जुड़े कुल आवंटन बढ़कर 1,32,296.85 करोड़ रुपए हो गए हैं, जो 2025–26 (बजट अनुमान) में 1,16,132.5 करोड़ रुपए थे। यानीइस वर्ष बाल बजट में कुल 16,164.35 करोड़ रुपए की सीधी बढ़ोतरी की गई है।
पिछले बजट (2025–26) की तुलना में, कुल केंद्रीय बजट में बाल बजट की हिस्सेदारी 2.29 प्रतिशत से बढ़कर 2.47 प्रतिशत हो गई है। वहीं जीडीपी के प्रतिशत के रूप में यह बढ़ोतरी 0.33 प्रतिशत से बढ़कर 0.34 प्रतिशत हुई है।
केंद्रीय बजट 2026–27 में बच्चों के लिए आवंटन में हुई बढ़ोतरी की ओर इशारा करते हुए चाइल्ड राइट्स एंड यू की सीईओ पूजा मारवाहा ने कहा,“यह बजट एक सकारात्मक मंशा का संकेत देता है, लेकिन भारत की जनसांख्यिकीय वास्तविकताओं और बच्चों की बढ़ती विकासात्मक जरूरतों के मुकाबले निवेश का कुल स्तर अब भी सीमित है। स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा में हुई क्रमिक बढ़ोतरी स्वागत योग्य है, लेकिन समावेशी और टिकाऊ विकास के लिए बच्चों को कहीं अधिक स्पष्ट प्राथमिकता देनी होगी। इसके लिए ऐसे मजबूत और समान निवेश जरूरी हैं, जो साल-दर-साल की मामूली बढ़ोतरी से आगे जाएं।”

बाल स्वास्थ्य और पोषण

प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य (RCH), स्वास्थ्य प्रणाली सुदृढ़ीकरण, राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम और राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन के लिए फ्लेक्सिबल पूल के आवंटन में 261.15 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई है और यह बढ़कर4,591.58 करोड़ रुपए हो गया है। सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के बजट में 5.19 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। इसके तहत आवंटन 969 करोड़ रुपए बढ़कर 19,635 करोड़ रुपए हो गया है।
पीएम पोषण शक्ति निर्माण योजना को 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी मिली है और इसका बजट बढ़कर 12,749.99 करोड़ रुपए हो गया है। अहम् बात यह है कि जल जीवन मिशन को वित्त वर्ष 2024–25 के बाद फिर से बाल बजट में शामिल किया गया है। इसके लिए 6,736.36 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जो बच्चों के स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करने की अहम भूमिका को दर्शाता है।

पोषण 2.0 सरकार की प्रमुख पोषण योजना है, जिसका उद्देश्य पूरक पोषण के ज़रिये बच्चों, किशोरियों और गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाओं में कुपोषण को कम करना है। बजट में हुई बढ़ोतरी से आंगनवाड़ी स्तर पर पोषण सेवाओं की पहुंच बढ़ने और उनकी नियमित आपूर्ति को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

बाल विकास, शिक्षा और संरक्षण

-मिशन वात्सल्य के बजट में 3.33 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी हुई है और यह 1,550 करोड़ रुपए कर दिया गया है।
-समग्र शिक्षा अभियान को 42,100 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है, जो पिछले साल के मुकाबले 2.06 प्रतिशत अधिक है।
-आदिवासी बच्चों के लिए एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों के बजट में 20 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है और इसे 7,200 करोड़ रुपए मिले हैं। नवोदय विद्यालयों और केंद्रीय विद्यालयों के बजट में भी बढ़ोतरी की गई है।
-उल्लेखनीय है कि 2026–27 में अटल टिंकरिंग लैब्स के लिए 3,200 करोड़ रुपए का बड़ा आवंटन सरकारी स्कूलों में नवाचार और वैज्ञानिक सोच पर नए सिरे दी जा रही प्राथमिकता को दर्शाता है। वहीं, स्किल इंडिया कार्यक्रम को बाल बजट में शामिल करना राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप कदम है।
हालांकि, हाशिए पर रहने वाले समुदायों के बच्चों के लिए कई छात्रवृत्ति योजनाओं में कोई बदलाव नहीं देखा गया है। अनुसूचित जाति के लिए प्री और पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्तियों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। वहीं ओबीसी, ईबीसी, डीएनटी और दिव्यांग बच्चों की छात्रवृत्तियों में सिर्फ मामूली इजाफा देखा गया है।

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