त्रिशूल लेकर चौरागढ़ महादेव के लिए निकले श्रद्धालु, सतपुड़ा की वादियों में गूंजे हर-हर महादेव के जयकारे

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छिंदवाड़ा

 सतपुड़ा की वादियों में  हर-हर महादेव के जयकारे गुंजायमान हो गए हैं। महादेव मेले में 30 हजार से ज्यादा श्रद्धालु पहले दिन विभिन्न इलाकों से पचमढ़ी स्थित चौरागढ़ महादेव के लिए निकले। मेले को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है। वैसे तो ये मेला पचमढ़ी में भरता है, लेकिन श्रद्धालु छिंदवाड़ा जिले से होकर ही इस मेले में जा रहे हैं।

खासतौर से महाराष्ट्र से आने वाले श्रद्धालु परासिया, दमुआ, जुन्नारदेव से गुजरकर दर्शन करने के लिए रवाना हो गए। महादेव मेला जाने के लिए श्रद्धालु भूरा भगत और पचमढ़ी वाले रास्ते से पहुंचते हैं। 15 दिन तक चलने वाले मेले में मप्र और महाराष्ट्र के लगभग पांच लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।

वजनी त्रिशूल लेकर निकले श्रद्धालु

यात्रा के दौरान श्रद्धालु भारी वजनी त्रिशूल लेकर ऊंची-नीची पहाड़ियों पर पैदल निकले। ये त्रिशूल महादेव को चढ़ाए जाएंगे। श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, भोजन और पार्किंग की व्यवस्था भूरा भगत क्षेत्र, मटकुली में की गई है। छोटा महादेव मंदिर (जमुनिया) में भी मेला लगा है, जो पेंच नदी के तट पर स्थित है।

महादेव मेला रूट पर विशेष जांच

डीएसपी यातायात रामेश्वर चौबे ने बताया कि मेला रूट के साथ ही भूरा भगत क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था के साथ ही यातायात व्यवस्था संभालने के लिए तकरीबन 250 पुलिस कर्मी तैनात किए गए हैं। छिंदवाड़ा से लेकर मटकुली सीमा और भूरा भगत मार्ग पर 30 जगह चेकिंग पाइंट बनाए गए हैं। शराब पीकर वाहन चलाने वालों को लेकर महादेव मेला रूट पर विशेष जांच कर कार्रवाई की गई।

पुलिस ने देहात थाने के आगे और कुआं बादला में दो स्थानों पर चेकिंग पाइंट बनाए हैं। जहां पर वाहन चालकों की ब्रेथ एनालाइजर से जांच की जा रही है। इसके साथ ही परासिया व जुन्नारदेव थाना क्षेत्र में दो स्थानों पर भी वाहन चालकों की ब्रेथ एनालाइजर से जांच की गई।

एक्सीडेंटल पाइंट स्थानीय पुलिस ने चिह्नित किए हैं, जिन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पचमढ़ी के साथ ही जुन्नारदेव से तामिया मार्ग और दमुआ मार्ग पर भी हादसों को रोकने इंतजाम किए गए हैं।

यह है मेले का इतिहास

16वीं सदी की बात है जब भूरा भगत बचपन से ही प्रभु की आराधना में लीन रहते थे। एक बार भजन के दौरान वे समाधि में चले गए। 24 घंटे बाद उनकी समाधि टूटी। इसके बाद वे घर त्यागकर प्रभु की भक्ति में लीन हो गए। किवदंतियों के अनुसार चौरागढ़ की पहाड़ियों में साधना के दौरान उन्हें महादेव के दर्शन हुए थे।

उन्होंने महादेव से वरदान मांगा कि मैं आपके ही चरणों में रहूं और यहां आने वालों को आपका मार्ग बता सकूं। तब से महाशिवरात्रि पर मेले की परंपरा शुरू हुई।

भूराभगत हैं भोलेनाथ के द्वारपाल

महादेव मेला चौरागढ़ महादेव, पचमढ़ी में लगता है। भूरा भगत का मंदिर छिंदवाड़ा जिले के दमुआ ब्लाक में स्थित है। दमुआ से भूराभगत की दूरी 27 किमी है और ये रास्ता काफी संकरा है। मान्यता अनुसार महादेव मंदिर जाने से पहले श्रद्धालुओं ने भूरा भगत के दर्शन और पूजन किया। उन्हें भगवान भोलेनाथ का द्वारपाल कहा जाता है।

किवदंती है कि भूरा भगत भगवान शिव के भक्त थे और महादेव ने उन्हें आशीर्वाद दिया था कि उनके दर्शन के बिना यात्रा अधूरी है। उनकी मूर्ति एक द्वारपाल की तरह भक्तों का मार्गदर्शन करती है। महाशिवरात्रि मेले में यहां भारी भीड़ होती है।

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