ईमानदारी की मिसाल: हमीदिया कॉलेज में लौटाया गया कीमती वॉलेट

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भोपाल। तेजी से बदलते दौर में जहां अक्सर ईमानदारी पर सवाल खड़े होते हैं, वहीं राजधानी भोपाल के Hamidia College Bhopal से आई एक घटना ने समाज को सकारात्मक संदेश दिया है। यह घटना साबित करती है कि सच्चाई और नैतिकता आज भी जीवित हैं।

परीक्षा फॉर्म भरने आए थे प्रदीप सक्सेना

दो-तीन दिन पूर्व प्रदीप सक्सेना कॉलेज में परीक्षा फॉर्म भरने पहुंचे थे। औपचारिकताएं पूरी करने के बाद वे मार्कशीट की फोटोकॉपी कराने कॉलेज परिसर में संचालित एमपी ऑनलाइन केंद्र गए। कार्य पूरा होने के बाद वे वहां से चले तो गए, लेकिन जल्दबाजी में अपना कीमती वॉलेट वहीं भूल गए।

वॉलेट में क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, पैन कार्ड, आधार कार्ड सहित अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज मौजूद थे। ऐसे दस्तावेज खो जाने पर व्यक्ति को आर्थिक और कानूनी दोनों तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

कपिल ने दिखाई सतर्कता और मानवता

एमपी ऑनलाइन केंद्र पर कार्यरत कपिल को जब वॉलेट मिला तो उन्होंने उसे अपने पास सुरक्षित रख लिया। इसके बाद आधार कार्ड में दर्ज जानकारी के माध्यम से मोबाइल नंबर प्राप्त कर तत्काल प्रदीप सक्सेना को फोन कर सूचित किया कि उनका वॉलेट सुरक्षित उनके पास है।

यह सूचना पाकर प्रदीप सक्सेना ने राहत की सांस ली और कॉलेज पहुंचकर अपना वॉलेट सकुशल प्राप्त किया। उन्होंने कपिल की ईमानदारी और जिम्मेदारी की भावना की खुले दिल से प्रशंसा की।

प्राचार्य ने किया सम्मान

जब इस घटना की जानकारी कॉलेज के प्राचार्य Anil Shivani को दी गई तो उन्होंने इसे संस्थान के लिए गर्व का विषय बताया। उन्होंने कपिल को अपने कक्ष में बुलाकर उसकी ईमानदारी की सराहना की और सम्मान स्वरूप एक कंबल भेंट किया।

इस अवसर पर हमीदिया कॉलेज ओल्ड स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष Ashok Chaturvedi भी उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि समाज में ऐसे उदाहरण ही नैतिक मूल्यों को जीवित रखते हैं और युवाओं को सही दिशा प्रदान करते हैं।

नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा

कॉलेज परिसर में उपस्थित विद्यार्थियों और स्टाफ ने भी इस पहल की सराहना की। उनका कहना था कि जहां एक ओर छोटी-सी लापरवाही बड़ी परेशानी बन सकती थी, वहीं कपिल की सजगता ने संभावित संकट को टाल दिया।

यह घटना न केवल एक व्यक्ति की ईमानदारी की कहानी है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि समाज में आज भी ऐसे लोग मौजूद हैं जो अपने कर्तव्य और नैतिक मूल्यों को सर्वोपरि रखते हैं।

अंततः यह कहा जा सकता है कि—
ईमानदारी अभी जिंदा है, और ऐसे उदाहरण समाज में भरोसे की लौ जलाए रखते हैं।

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