विश्व सिंधी सेवा संगम की भव्य बैठक में 25–30 देशों की सहभागिता, विजय पाहुजा बने अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष

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भोपाल/नई दिल्ली।

भारत में आयोजित विश्व सिंधी सेवा संगम की भव्य अंतरराष्ट्रीय बैठक ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर भारतीय नेतृत्व की मजबूती और निरंतरता को रेखांकित किया। इस ऐतिहासिक आयोजन में भारत सहित 25 से 30 देशों के प्रतिनिधियों की सक्रिय सहभागिता रही, जिसने कार्यक्रम को विश्वव्यापी एकता, सांस्कृतिक समरसता और सामाजिक सहयोग का सशक्त प्रतीक बना दिया।

बैठक का सबसे गौरवपूर्ण क्षण तब आया, जब विजय पाहुजा को सर्वसम्मति से संगठन का अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष (International President) मनोनीत किया गया। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व भी संगठन का नेतृत्व भारतीय हाथों में रहा है और यह नया मनोनयन उसी सफल परंपरा की प्रभावशाली निरंतरता को दर्शाता है। इस निर्णय से देश-विदेश में बसे सिंधी समाज में उत्साह, विश्वास और गर्व की भावना और अधिक प्रबल हुई है।

वैश्विक भरोसे की मुहर

प्रतिनिधियों ने एक स्वर में कहा कि विजय पाहुजा का चयन केवल संगठनात्मक निर्णय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय नेतृत्व पर निरंतर बढ़ते भरोसे का प्रमाण है। विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधियों ने भारत की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय नेतृत्व ने हमेशा समाज को जोड़ने, सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और सेवा कार्यों को नई दिशा देने में अग्रणी भूमिका निभाई है।

समाज, संस्कृति और भविष्य की रणनीति पर मंथन

कार्यक्रम के दौरान सिंधी समाज की सामाजिक चुनौतियों, सांस्कृतिक संरक्षण, युवाओं की भागीदारी, महिला सशक्तिकरण और भविष्य की वैश्विक रणनीतियों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। शिक्षा, स्वास्थ्य, सेवा परियोजनाओं और डिजिटल माध्यमों से समाज को जोड़ने जैसे विषयों पर भी ठोस प्रस्ताव रखे गए।

बैठक में यह भी तय किया गया कि आने वाले समय में विश्व सिंधी सेवा संगम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वित सेवा अभियानों, सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों और युवा नेतृत्व विकास पहलों को और गति देगा।

बिहार सहित पूरे देश में हर्ष

इस उपलब्धि को बिहार सहित पूरे भारत में सिंधी समुदाय के लिए प्रेरणास्रोत और सम्मान का विषय माना जा रहा है। स्थानीय सामाजिक संगठनों और समाजसेवियों ने विजय पाहुजा को बधाइयाँ देते हुए उम्मीद जताई कि उनके नेतृत्व में संगठन वैश्विक स्तर पर नई ऊँचाइयों को छुएगा।

कुल मिलाकर, यह भव्य बैठक न केवल वैश्विक सिंधी समाज को एक सूत्र में पिरोने का मंच बनी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारतीय नेतृत्व की सशक्त मौजूदगी को भी मजबूती से स्थापित कर गई—जो आने वाले वर्षों में समाजिक, सांस्कृतिक और सेवा कार्यों के लिए नई दिशा और ऊर्जा प्रदान करेगी।

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