मंदसौर में ‘शक्ति की आराधना’: नवरात्र में बेटियों को आत्मरक्षा संग संस्कृति का पाठ

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हाइलाइट्स

  • “नवरात्र की भक्ति संग आत्मरक्षा की शक्ति”

  • “बेटियां बनीं आत्मनिर्भर, संस्कारित और सजग”

  • “स्वदेशी अपनाओ, पॉलीथिन हटाओ”

मंदसौर। नवरात्रि के पावन अवसर पर मंदसौर की युवधर्म संस्था ने इस वर्ष लगातार दूसरे साल ‘शक्ति की आराधना’ कार्यक्रम का आयोजन किया है। यह आयोजन अपनी तरह का देश का अनूठा प्रयास माना जा रहा है, जहां परंपरा और आधुनिकता का संगम दिखाई दे रहा है।

नवरात्र के नौ दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में 200 से अधिक बेटियां निशुल्क आत्मरक्षा प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। खास बात यह है कि प्रतिदिन आत्मरक्षा प्रशिक्षण के साथ-साथ बेटियों को संस्कृति और धर्म की जानकारी भी दी जा रही है।

आयोजन के अंतर्गत प्रतिदिन आरती होती है और अलग-अलग क्षेत्रों में कार्यरत बहनें मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित होती हैं। इनके माध्यम से बेटियों को प्रेरणादायक अनुभव साझा किए जा रहे हैं, जिससे उनमें आत्मविश्वास और समाज सेवा की भावना मजबूत हो रही है।

कार्यक्रम केवल आत्मरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज सुधार के अनेक संदेश भी बेटियों तक पहुंचाए जा रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान पौधारोपण का महत्व, घर में पॉलीथिन का उपयोग रोकने का संकल्प, और स्वदेशी सामग्री को अपनाने का संदेश भी दिया जा रहा है।

संस्था के प्रतिनिधि हितेश शुक्ला ने बताया—
“हमारा उद्देश्य केवल आत्मरक्षा सिखाना नहीं है, बल्कि बेटियों को संस्कृति और जीवन मूल्यों से जोड़ना भी है। नवरात्र शक्ति की उपासना का पर्व है, और यही शक्ति हम इन बेटियों के भीतर जागृत करना चाहते हैं।”

प्रतिभागी बेटियां भी इस आयोजन को लेकर उत्साहित हैं। प्रशिक्षण प्राप्त कर रही छात्रा प्रिया शर्मा ने कहा—
“पहले हमें लगता था कि आत्मरक्षा केवल कठिन तकनीक है, लेकिन यहां इसे सरल तरीके से सिखाया जा रहा है। अब हम आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी महसूस कर रहे हैं।”

इसी तरह, एक अन्य प्रतिभागी ने बताया—
“आत्मरक्षा के साथ-साथ हमें पौधारोपण, स्वदेशी अपनाने और पॉलीथिन से बचने की शिक्षा भी मिल रही है। यह आयोजन हमें समाज और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाने का भी संदेश देता है।”

अतिथि के रूप में शामिल हुई समाजसेवी अर्चना दुबे ने कहा—
“आज की बेटियों को शिक्षा और आत्मरक्षा दोनों की जरूरत है। यह आयोजन न केवल बेटियों को सुरक्षित बनाता है, बल्कि उनमें समाज सेवा और संस्कारों की गहरी नींव भी रखता है।”

युवधर्म संस्था का यह प्रयास बेटियों को सुरक्षित, जागरूक और संस्कारित बनाने की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम है। नवरात्र में शक्ति की पूजा के साथ बेटियों के सशक्तिकरण का यह संगम समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।

आयोजन की खास बातें

  • 200 से अधिक बेटियां कर रही हैं आत्मरक्षा प्रशिक्षण

  • रोजाना आरती और अलग-अलग क्षेत्रों की अतिथि बहनें

  • पौधारोपण और स्वदेशी अपनाने का संकल्प

  • पॉलीथिन का उपयोग घर में रोकने की पहल

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