पांच दिवसीय बैंकिंग पर सरकार की चुप्पी के खिलाफ बैंककर्मियों का बिगुल, 27 जनवरी को देशव्यापी हड़ताल

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विवेक, भोपाल। पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करने और शेष सभी शनिवारों को अवकाश घोषित करने की मांग को लेकर बैंक कर्मियों का आंदोलन तेज होता जा रहा है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर गुरुवार को देशभर में राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन आयोजित किए गए। इसी क्रम में राजधानी भोपाल में सैकड़ों बैंक कर्मचारी और अधिकारी शाम 5:30 बजे पंजाब नेशनल बैंक, इंदिरा प्रेस कॉम्प्लेक्स के सामने एकत्रित हुए और जोरदार नारेबाजी करते हुए प्रभावी प्रदर्शन एवं सभा का आयोजन किया।

सभा को संबोधित करते हुए पदाधिकारियों ने साफ कहा कि सरकार द्वारा लगातार टालमटोल और वादा-खिलाफी के कारण बैंक कर्मियों को आंदोलन के रास्ते पर उतरना पड़ा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर तत्काल निर्णय नहीं हुआ, तो 27 जनवरी 2026 को पूरे देश में अखिल भारतीय बैंक हड़ताल की जाएगी।

9 संगठनों का संयुक्त मंच, 8 लाख कर्मी होंगे शामिल

वक्ताओं ने बताया कि UFBU देशभर के बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों के 9 प्रमुख संगठनों का संयुक्त मंच है, जिनमें—
AIBEA, AIBOC, NCBE, AIBOA, BEFI, INBEF, INBOC, NOBW और NOBO शामिल हैं।
UFBU के अनुसार 27 जनवरी 2026 की प्रस्तावित हड़ताल में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, निजी बैंक, विदेशी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और सहकारी बैंकों के लगभग 8 लाख बैंक कर्मचारी व अधिकारी भाग लेंगे।

क्या है मुख्य मांग?

आंदोलनरत बैंक कर्मियों की प्रमुख मांग है कि—

  • बैंकिंग उद्योग में 5-दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने हेतु केंद्र सरकार तत्काल स्वीकृति दे।

  • वर्तमान में केवल दूसरे व चौथे शनिवार अवकाश के बजाय बाकी सभी शनिवारों को भी अवकाश घोषित किया जाए।

वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह मांग 7 दिसंबर 2023 को IBA और UFBU के बीच हुए समझौता ज्ञापन तथा 8 मार्च 2024 के सेटलमेंट/जॉइंट नोट के अनुरूप है, जिसे IBA द्वारा सरकार को अनुशंसा के साथ भेजा जा चुका है। इसके बावजूद अब तक सरकार की मंजूरी लंबित है।

2015 से चला आ रहा मुद्दा, सरकार ने नहीं निभाया वादा

सभा में वक्ताओं ने बताया कि वर्ष 2015 में हुए 10वें द्विपक्षीय समझौते/7वें जॉइंट नोट में हर माह के दूसरे और चौथे शनिवार अवकाश तय हुआ था और अन्य शनिवारों को आधे दिन के बजाय पूर्ण कार्यदिवस किया गया था। उस समय यह भरोसा भी दिया गया था कि बाकी शनिवारों को भी अवकाश घोषित करने के विषय पर उचित समय पर विचार किया जाएगा, लेकिन यह मुद्दा सालों से लंबित रखा गया।

मार्च 2025 की हड़ताल टली, पर आश्वासन निकला खोखला

UFBU ने इस मांग को लेकर 24 और 25 मार्च 2025 को दो दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया था, जिसे वित्त मंत्रालय की ओर से “मामला विचाराधीन है” जैसे आश्वासन के बाद स्थगित कर दिया गया था।
अब यूनियन नेताओं का आरोप है कि सरकार ने जानबूझकर दो वर्षों से मंजूरी अटका रखी है, जिससे कर्मचारियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

“RBI-LIC में लागू, बैंककर्मियों से भेदभाव क्यों?”

वक्ताओं ने कहा कि वित्तीय क्षेत्र के कई संस्थानों—RBI, LIC और GIC—में पांच दिवसीय सप्ताह पहले से लागू है। केंद्र व राज्य सरकारी कार्यालय भी सोमवार से शुक्रवार तक ही चलते हैं। स्टॉक एक्सचेंज, मनी मार्केट और विदेशी मुद्रा बाजार भी वीकेंड पर बंद रहते हैं।
ऐसे में बैंक कर्मचारियों को इससे अलग रखना स्पष्ट भेदभाव है।

उन्होंने यह भी कहा कि सोमवार से शुक्रवार के कार्य घंटों में थोड़ा समायोजन कर शेष शनिवारों को अवकाश घोषित करने से ग्राहकों को बड़ी परेशानी नहीं होगी, क्योंकि अब डिजिटल बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, एटीएम और अन्य सेवा चैनल उपलब्ध हैं।

ग्राहकों से सहयोग की अपील

सभा के अंत में बैंक यूनियनों ने ग्राहकों से अपील की कि हड़ताल की स्थिति में होने वाली असुविधा को समझें और सहयोग बनाए रखें। नेताओं ने कहा कि यह आंदोलन कर्मचारियों के सम्मान, स्वास्थ्य और कार्य–जीवन संतुलन से जुड़ा है, जिसे लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है।

भोपाल प्रदर्शन में इन नेताओं ने किया संबोधन

सभा को फोरम मैं शामिल बैंक यूनियंस के पदाधिकारियों वी के शर्मा, सुबिन सिन्हा, प्रवीण मेघानी, नजीर कुरैशी, दिनेश झा, विशाल जैन, संजय कुदेशिया, वी एस नेगी, सुनील सिंह, रजनीश पौराणिक,पंकज ठाकुर, अरविंद पंड्यार, सुरेश मीना, गुणशेखरन, निर्भय सिंह ठाकुर, अंबरीश नंदा, दीपक शुक्ला, आशीष तिवारी, क्षितिज तिवारी, लता भारती, जे पी दुबे, सत्येंद्र चौरसिया, किशन खेराजानी,के वासुदेव सिंह, विजय चोपड़े, डी के सिंह, मनीष भार्गव, विजय चोइथानी, नितिन भिकानी, आस्तीक वाजपेई, देवेंद्र खरे, राजीव उपाध्याय, महेंद्र गुप्ता, सतीश चौबे, अमित गुप्ता, अमोल अचवाल, वैभव गुप्ता, अमित शर्मा, शोभित वाडेल, सिद्धार्थ सिंह, वासदेव जेठानी, भामा चौधरी, दिव्या खरे, रवीना मिश्रा, श्रेया पाठक, राजेश्वरी, रिचा शर्मा, राषि सक्सेना, सुनील देसाई, संतोष मालवीय, शैलेंद्र नरवरे सहित अनेक पदाधिकारियों ने संबोधित किया। बड़ी संख्या में महिला बैंक कर्मियों की उपस्थिति भी रही।

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