तेहरान/ वाशिंगटन, 20 अप्रैल – ईरान ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित दूसरे दौर की शांति वार्ता में भाग
लेने से इनकार कर दिया है, जिसका मुख्य कारण ईरानी बंदरगाहों पर जारी अमेरिकी नाकेबंदी बताया गया है।इस बीच, अमेरिकी सेना ने एक ईरानी मालवाहक जहाज को जब्त कर लिया, जिससे पश्चिम एशिया में नाजुक दौर से गुजर रही शांति पर और अनिश्चितता व्याप्त हो गयी है।
ईरान ने पुष्टि की है कि अमेरिकी नौसेना ने ओमान की खाड़ी में ईरानी जहाज ‘टौस्का’ को ‘हमला कर जब्त’ किया, जिसे उसने युद्धविराम का उल्लंघन बताया और जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी।
ईरान के खत्म उल-अंबिया मुख्यालय ने कहा कि अमेरिकी कार्रवाई ईरानी वाणिज्यिक जहाजों पर हमला है और इसे ‘सशस्त्र समुद्री डकैती’ करार दिया।
ईरान की अर्ध-सरकारी तस्नीम समाचार एजेंसी के अनुसार, इस घटना के बाद ईरान ने अमेरिकी युद्धपोतों पर ड्रोन हमले भी किये, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ईरानी अधिकारियों ने कहा कि अमेरिकी शर्तें ‘अवास्तविक और अनुचित” हैं और जब तक नाकेबंदी नहीं हटायी जाती, वार्ता संभव नहीं है। उन्होंने अमेरिका पर शर्तें बदलने का आरोप भी लगाया।
ईरानी मीडिया के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में वार्ता के सफल होने की ‘कोई स्पष्ट संभावना नहीं’ है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान में फिर वार्ता की घोषणा की है।दोनों देशों के बीच जारी दो सप्ताह का युद्धविराम 22 अप्रैल को समाप्त होने वाला है।
इस बीच, अमेरिकी केन्द्रीय कमान (सेंटकॉम) ने पुष्टि की कि अमेरिकी बलों ने रविवार को अरब सागर में ईरानी झंडे वाले मालवाहक जहाज को रोका।
सेंटकॉम के अनुसार, निर्देशित मिसाइल विध्वंसक यूएसएस स्प्रूअन्स ने ‘टौस्का’ को रोका, जो ईरान के बंदर अब्बास की ओर जा रहा था। कई चेतावनियों के बावजूद जहाज के चालक दल ने निर्देशों का पालन नहीं किया।इसके बाद अमेरिकी जहाज ने अपनी पांच इंच की तोप से इंजन कक्ष को निशाना बनाकर उसकी गति निष्क्रिय कर दी, जिसके बाद अमेरिकी मरीन बलों ने जहाज पर चढ़कर उसे अपने नियंत्रण में ले लिया।
सेंटकॉम ने कहा कि कार्रवाई ‘संतुलित और पेशेवर तरीके’ से की गयी। उसने यह भी बताया कि नाकेबंदी
लागू होने के बाद से 25 वाणिज्यिक जहाजों को वापस लौटने या दिशा बदलने के निर्देश दिये गये हैं।
नाकेबंदी नहीं हटायी जाती तब तक वार्ता संभव नहीं – ईरान
