विवेक झा, भोपाल, 14 अक्टूबर 2025।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत आज मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत मिशन के माध्यम से विश्व में एक सशक्त विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि यदि हम अपने दैनिक जीवन में स्वदेशी उत्पादों को अपनाएँ और भारतीय उद्यमियों एवं कारीगरों का समर्थन करें, तो एक सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र के निर्माण में प्रत्यक्ष योगदान दे सकते हैं।
मुख्यमंत्री मंगलवार को समन्वय भवन, भोपाल में आयोजित आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय को स्वदेशी अपनाने की शपथ दिलाई और कहा कि आने वाले त्योहारों में लोग अधिक से अधिक देसी उत्पादों का उपयोग करें, ताकि देश की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाया जा सके।
“स्वदेशी ही आत्मनिर्भरता की नींव है”
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत का व्यापार और उद्योग ऐतिहासिक रूप से समृद्ध रहा है। भारतीय समाज “जियो और जीने दो” की नीति पर चलता रहा है, जिसके कारण हमारी जीवन पद्धति अनुशासित और संतुलित रही है।
उन्होंने कहा कि “धर्मादा” की परंपरा से शिक्षा, स्वास्थ्य और सेवा जैसे जनकल्याण कार्य समाज के सहयोग से चलते रहे हैं, लेकिन पिछली सरकारों की लाइसेंस, कोटा और परमिट जैसी नीतियों ने देश की मुद्रा को कमजोर किया और समाज संचालित व्यवस्थाओं में हस्तक्षेप बढ़ा दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ने भारत को अपने गौरवशाली अतीत की ओर देखने की दृष्टि दी। संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में भाषण देकर उन्होंने भारत की बौद्धिक शक्ति का परिचय विश्व को कराया। वहीं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आज भारत की वैश्विक साख और आर्थिक सामर्थ्य स्थापित हुई है।
मध्यप्रदेश सरकार का संकल्प: उद्योग, निवेश और स्वदेशी को बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में व्यापार, व्यवसाय और कर व्यवस्था में पारदर्शी नीतियों ने आम नागरिक का जीवन सुगम बनाया है।
“आत्मनिर्भर भारत—आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए हमारी सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है,”
उन्होंने कहा।
प्रदेश में उद्योग, निवेश और स्थानीय उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर योजनाएँ चलाई जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक उद्योगों और कारीगरों को प्राथमिकता दें ताकि राज्य का आर्थिक ढांचा मजबूत हो।
स्वदेशी अपनाने की ली शपथ
कार्यक्रम में उपस्थित नागरिकों को आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने के लिए शपथ दिलाई गई।
इस शपथ में शामिल प्रमुख बिंदु थे—
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अपने दैनिक जीवन में भारतीय उत्पादों का अधिकतम उपयोग।
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विदेशी वस्तुओं की जगह देसी विकल्प अपनाना।
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घर, कार्यस्थल और समाज में भारतीय वस्तुओं को प्राथमिकता देना।
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गांव, किसान और कारीगरों के उत्पादों को बढ़ावा देना।
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पर्यावरण के अनुकूल स्वदेशी वस्तुओं का प्रयोग।
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भारत के पर्यटन स्थलों को प्राथमिकता देना।
मुख्यमंत्री ने युवाओं और नई पीढ़ी से भी अपील की कि वे अपने पारिवारिक और सामाजिक जीवन में भारतीय भाषाओं का उपयोग बढ़ाएँ और स्थानीय संसाधनों पर गर्व करें।
भोपाल व्यापार जगत ने किया मुख्यमंत्री का अभिनंदन
कार्यक्रम के दौरान न्यू मार्केट व्यापार संरक्षण समिति के पदाधिकारियों ने राजधानी को विकास की नई सौगातें देने के लिए मुख्यमंत्री का आत्मीय अभिनंदन किया।
समिति के अध्यक्ष श्री सतीश गंगराड़े, सचिव श्री पवन वरदानी और उपाध्यक्ष श्री अजय देवनानी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को शॉल, श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
उपाध्यक्ष अजय देवनानी ने बताया कि भोपाल को
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जीआईएस (ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट) के आयोजन,
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मेट्रोपोलिटन सिटी और मेट्रो सिटी का दर्जा,
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कन्वेंशन सेंटर की स्थापना,
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तथा व्यावसायिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने जैसे निर्णयों से नई पहचान मिली है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव की दूरदर्शी सोच से भोपाल में विकास और निवेश के नए अवसर खुलेंगे, जिससे रोजगार और व्यापार दोनों को बल मिलेगा।
जनप्रतिनिधियों ने रखे विचार
कार्यक्रम को सांसद एवं भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, सांसद आलोक शर्मा और विधायक भगवानदास सबनानी ने भी संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने आत्मनिर्भर भारत मिशन को प्रधानमंत्री मोदी की ऐतिहासिक पहल बताया और कहा कि इस दिशा में मध्यप्रदेश तेजी से प्रगति कर रहा है।
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का सपना तभी साकार होगा जब प्रत्येक नागरिक स्वदेशी को अपनाए और अपने देश की आर्थिक शक्ति पर विश्वास करे। उन्होंने उपस्थित नागरिकों से आह्वान किया—
“आइए, इस दीपावली और आगे के हर उत्सव में स्वदेशी को अपनाएँ, क्योंकि आत्मनिर्भर भारत का दीप प्रत्येक घर में तभी जलेगा जब हम अपने देश के उत्पादों से उसे रोशन करेंगे।”
