होली बाजार में बदली तस्वीर : चीन का हिस्सा घटा, ‘मेक इन इंडिया’ का रंग चढ़ा

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भोपाल। होली का त्योहार नजदीक आते ही राजधानी के बाजार सतरंगी रौनक से सराबोर हो गए हैं। चौक, आज़ाद मार्केट, इतवारा, मारवाड़ी रोड, लोहा बाजार, भेल, 10 नंबर मार्केट, बैरागढ़, करोंद और बैरसिया सहित शहर के प्रमुख बाजारों में खरीदारी तेज हो गई है। लेकिन इस बार होली के बाजार की तस्वीर कुछ बदली-बदली नजर आ रही है। जहां एक दशक पहले तक फैंसी पिचकारी, स्प्रे और सजावटी सामान में चीन निर्मित उत्पादों का दबदबा रहता था, वहीं अब स्वदेशी उत्पादों ने मजबूत पकड़ बना ली है।

व्यापारियों के अनुसार आयात नियंत्रण, स्थानीय उत्पादन में वृद्धि, एमएसएमई और स्टार्टअप इकाइयों की भागीदारी तथा हर्बल उत्पादों की बढ़ती मांग के कारण विदेशी माल का हिस्सा लगातार घट रहा है।

‘आत्मनिर्भर भारत’ का असर, ग्राहक खुद पूछ रहे—चीन का तो नहीं?

भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री एवं कैट के पूर्व प्रवक्ता विवेक साहू ने बताया कि उपभोक्ताओं की सोच में बड़ा बदलाव आया है।
उन्होंने कहा, “पहले ग्राहक अनजाने में चीन निर्मित सामान खरीद लेते थे, लेकिन अब जागरूकता बढ़ी है। ग्राहक स्वयं दुकानदार से पूछते हैं कि यह सामान चीन का तो नहीं है। सुरक्षित, हर्बल और भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता देने की सोच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ संदेश का प्रभाव है, जिससे स्थानीय उद्योग और छोटे व्यापारी सीधे लाभान्वित हो रहे हैं।”

उनके अनुसार एमएसएमई और स्टार्टअप इकाइयों की बढ़ती भागीदारी ने भी चीन पर निर्भरता कम करने में अहम भूमिका निभाई है।

देशभर में 18 से 22 हजार करोड़ का अनुमानित कारोबार

देशभर में इस वर्ष होली का कुल कारोबार लगभग 18,000 से 22,000 करोड़ रुपये के बीच आंका जा रहा है। इसमें चीन से आने वाला माल घटकर करीब 3,500 से 5,000 करोड़ रुपये (लगभग 18–25 प्रतिशत) रह गया है, जबकि 10 वर्ष पहले यह हिस्सा 70–75 प्रतिशत तक हुआ करता था।

किस सामान में कितना विदेशी और कितना स्वदेशी

बाजार विश्लेषण के अनुसार—

  • पिचकारी (कार्टून/टैंक मॉडल) : 60–70% भारतीय, 30–40% चीन

  • मास्क व कैरेक्टर आइटम : 60–70% भारतीय, 30–40% चीन

  • कलर स्प्रे व फोम स्प्रे : 50–60% भारतीय, 40–50% चीन

  • पानी के गुब्बारे पैक : 70–80% भारतीय, 20–30% चीन

  • गुलाल व हर्बल रंग : 90–100% भारतीय, 5–10% चीन

भोपाल में हर्बल रंगों की बढ़ी मांग

राजधानी में इस बार हर्बल गुलाल, ऑर्गेनिक रंग और देसी पिचकारी की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। साधारण पिचकारी और रंग लगभग पूरी तरह भारतीय हैं, जबकि बैटरी व म्यूजिकल थीम वाली पिचकारी में आंशिक निर्भरता बनी हुई है।

थोक पिचकारी एवं रंग व्यवसायी सौरभ साहू और पंकज जैन के अनुसार, “ग्राहक अब केमिकल रंगों से दूरी बना रहे हैं। लोग बच्चों की त्वचा और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए हर्बल रंग, फूलों से बने गुलाल और देसी पिचकारी खरीद रहे हैं। सुरक्षित उत्पादों की बिक्री में 30–40 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की जा रही है।”

भोपाल संभाग में 100–150 करोड़ का अनुमान

होली से रंग पंचमी तक भोपाल संभाग में 100 से 150 करोड़ रुपये तक के व्यापार का अनुमान लगाया जा रहा है। अनुमानित कारोबार इस प्रकार है—

  • रंग-गुलाल : 20–30 करोड़

  • पिचकारी-खिलौने : 8–10 करोड़

  • मिठाई-नमकीन : 20–25 करोड़

  • कपड़े : 10–15 करोड़

  • भांग-ठंडाई : 5–10 करोड़

  • डीजे-टेंट : 10–12 करोड़

  • किराना-डेयरी : 20–30 करोड़

  • पूजा सामग्री : 10–20 करोड़

विवेक साहू ने बताया कि सबसे अधिक लाभ किराना, डेयरी, मिठाई और फुटकर व्यापारियों को मिलता है, क्योंकि त्योहारों पर इन आवश्यक वस्तुओं की हर घर में मांग बढ़ जाती है।

होली सामग्री के मौजूदा रेट

बाजारों में रंग-गुलाल 15 से 120 रुपए प्रति 100 ग्राम तक उपलब्ध है। पिचकारी 20 से 1200 रुपए तक की रेंज में मिल रही है। पानी वाले गुब्बारे 25 से 80 रुपए प्रति पैक, जबकि स्प्रे और फोम सामग्री 80 से 450 रुपए तक बिक रही है। बड़े आइटम जैसे मिनी पूल 900 से 2500 रुपए तक उपलब्ध हैं।

व्यापारियों के अनुसार केमिकल रंगों की बिक्री घट रही है और सुरक्षित, त्वचा-अनुकूल रंगों की मांग तेजी से बढ़ रही है।

‘मेक इन इंडिया’ की होली

कुल मिलाकर इस बार की होली केवल रंगों की नहीं, बल्कि स्वदेशी उत्पादों की बढ़ती भागीदारी की भी होली बनती नजर आ रही है। बाजार में ‘मेक इन इंडिया’ का रंग पहले से कहीं अधिक गहरा दिखाई दे रहा है, जिससे स्थानीय उद्योग और छोटे व्यापारियों के चेहरों पर भी मुस्कान लौट आई है।

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