विवेक झा, भोपाल, 28 फरवरी 2026। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा नई स्पेसटेक पॉलिसी 2026 का गजट नोटिफिकेशन जारी होने के साथ ही राज्य के तकनीकी और निवेश परिदृश्य में नई हलचल तेज हो गई है। क्रेडाई भोपाल के प्रेसिडेंट मनोज मीक ने इसे राज्य की “टेक-गवर्नेंस यात्रा” का पहला ठोस स्तंभ बताते हुए कहा कि अब एआई पॉलिसी के औपचारिक ऐलान का इंतजार है, जो भोपाल को डबल एडवांटेज दे सकता है।
स्पेस, डेटा और एआई का रणनीतिक संगम
मनोज मीक के अनुसार, यह पॉलिसी ऐसे समय आई है जब भारत में स्पेस और जियोस्पेशल सेक्टर नीति, निवेश और व्यावहारिक उपयोग—तीनों स्तरों पर तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं। जनवरी में भोपाल में इस नीति का औपचारिक शुभारंभ रीजनल एआई समिट के साथ होना इस बात का संकेत है कि राज्य अब स्पेस, डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को एक साथ जोड़कर देख रहा है।
स्पेस सेक्टर अब पूरी तरह डेटा-ड्रिवन हो चुका है। इमेज प्रोसेसिंग, सिमुलेशन, ऑर्बिटल एनालिसिस, जियोस्पेशल एआई, डिजास्टर मॉडलिंग, मौसम पूर्वानुमान, कृषि विश्लेषण और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग (HPC) और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता बढ़ती जा रही है। पॉलिसी में इन क्षेत्रों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर समर्थन का उल्लेख इसे भविष्य उन्मुख बनाता है।
बड़े निवेश के लिए कस्टमाइज्ड इंसेंटिव
नई पॉलिसी में बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए कस्टमाइज्ड इंसेंटिव पैकेज का प्रावधान भी किया गया है। इसका अर्थ है कि यदि राज्य में स्पेस मैन्युफैक्चरिंग, ग्राउंड सिस्टम, डेटा पार्क, टेस्टिंग लैब या एयरोस्पेस इंटीग्रेशन से जुड़े बड़े निवेश प्रस्ताव आते हैं, तो सरकार केस-बाय-केस आधार पर विशेष समर्थन दे सकती है।
क्रेडाई का मानना है कि इससे बड़े एंकर निवेशकों को आकर्षित करने, ब्रांड वैल्यू बढ़ाने और दीर्घकालिक औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने का अवसर मिलेगा।
असली अवसर डाउनस्ट्रीम उपयोग में
मनोज मीक के अनुसार, राज्य के लिए सबसे बड़ा अवसर रॉकेट या सैटेलाइट निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि डाउनस्ट्रीम एप्लिकेशन में है। जियोस्पेशल विश्लेषण, जल-तंत्र मानचित्रण, अर्बन प्लानिंग, डिजास्टर मैनेजमेंट, कृषि प्रबंधन, भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण और पर्यावरण निगरानी जैसे क्षेत्र तत्काल लाभ दे सकते हैं।
केंद्र सरकार द्वारा नेशनल जियोस्पेशल मिशन और निजी स्पेस स्टार्टअप्स के लिए आईएन-स्पेस टेक्नोलॉजी एडॉप्शन फंड जैसी पहलों से यह स्पष्ट है कि राष्ट्रीय स्तर पर भी इस सेक्टर को प्रोत्साहन मिल रहा है। ऐसे में मध्यप्रदेश की टाइमिंग रणनीतिक रूप से सही मानी जा रही है।
भोपाल के लिए क्यों खास है यह नीति
राजधानी भोपाल के संदर्भ में यह नीति और भी अहम हो जाती है। बड़े तालाब और उसके कैचमेंट क्षेत्र की निगरानी, कलियासोत जल-तंत्र का मानचित्रण, मेट्रोपॉलिटन रीजन का विस्तार, मास्टर प्लान क्रियान्वयन, अतिक्रमण और अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई जैसे मुद्दे वर्तमान में प्रशासन के सामने हैं।
यदि सैटेलाइट इमेजरी, एआई आधारित विश्लेषण और फील्ड प्रशासन को एकीकृत प्लेटफॉर्म पर जोड़ा जाए, तो भोपाल को स्पेस-डेटा आधारित निर्णय केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है। इससे पारदर्शिता, सटीकता और नीति-निर्माण की गति में उल्लेखनीय सुधार संभव है।
अन्य राज्यों से प्रतिस्पर्धा
क्रेडाई ने उल्लेख किया कि कर्नाटक ने खुद को राष्ट्रीय स्पेस इनोवेशन और मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। गुजरात रिसर्च और कमर्शियलाइजेशन पर फोकस कर रहा है, तेलंगाना ने हैदराबाद को एयरोस्पेस-स्पेस इकोसिस्टम से जोड़ा है, जबकि आंध्र प्रदेश ने रोजगार सृजन को प्राथमिक लक्ष्य बनाया है।
ऐसे में मध्यप्रदेश को अपनी नीति को तेज़ी से क्रियान्वित कर प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त सुनिश्चित करनी होगी।
एआई पॉलिसी से मिलेगा डबल एडवांटेज
राज्य की प्रस्तावित एआई पॉलिसी में एआई इकोसिस्टम, लैब्स, स्किलिंग और गवर्नेंस में उपयोग की दिशा स्पष्ट की गई है। यदि स्पेसटेक पॉलिसी और एआई पॉलिसी एकीकृत रूप में लागू होती हैं, तो भोपाल को “नॉलेज एंड एआई सिटी” के रूप में विकसित करने की दिशा में ठोस आधार मिल सकता है।
मनोज मीक ने कहा कि यदि समय पर स्पेस-डेटा, एआई और अर्बन-वॉटर गवर्नेंस का मॉडल विकसित हो गया, तो भोपाल न केवल राज्य बल्कि देश के लिए टेक-गवर्नेंस का उदाहरण बन सकता है।
