कोलोरेक्टल कैंसर के लक्षणों से दिल्ली के 80 प्रतिशत से अधिक लोग अनजान l
दिल्ली 31 मार्च – कोलोरेक्टल (बड़ी आंत या मलाशय की कोशिकाओं में होने वाली अनियंत्रित वृद्धि) कैंसर जागरूकता माह के अवसर पर यहां मंगलवार को जारी राष्ट्रीय सर्वेक्षण में देशभर में पाचन स्वास्थ्य को लेकर गंभीर लापरवाही और जागरूकता की कमी सामने आई है।
मर्क स्पेशियलिटीज प्राइवेट लिमिटेड के इस सर्वे के अनुसार, देश की राजधानी दिल्ली के 80 प्रतिशत से अधिक लोग यह नहीं जानते कि मल में खून आना इस कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकता है। यह सर्वे देश के 14 प्रमुख शहरों में 25 से 65 वर्ष आयु वर्ग के 10,198 लोगों पर किया गया। विशेषज्ञ डॉक्टरों ने पाचन स्वास्थ्य के प्रति गंभीरता बरतने की जरूरत पर जोर दिया।
यहां प्रेस क्लब में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी सार्वजनिक रूप से साझा की गयी। संवाददाता सम्मेलन में डॉ. मनीष सिंघल, उपाध्यक्ष, चिकित्सा ऑन्कोलॉजी, यशोदा मेडिसिटी, दिल्ली; डॉ. शेफाली सरदाना, प्रमुख सलाहकार, चिकित्सा ऑन्कोलॉजी (जठरांत्र एवं स्त्रीरोग कैंसर), इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल, सरिता विहार, अपोलो एथेना वूमेन्स कैंसर सेंटर, डिफेंस कॉलोनी, अपोलो हॉस्पिटल, गुरुग्राम; और डॉ. आदित्य सरीन, सलाहकार चिकित्सा ऑन्कोलॉजी, सर गंगा राम अस्पताल, दिल्ली शामिल थे।
सर्वेक्षण के राष्ट्रीय आंकड़ों के अनुसार, 80 प्रतिशत से अधिक लोग अम्लता, कब्ज और अपच जैसी समस्याओं के लिए डॉक्टर से सलाह लेने के बजाय खुद दवा लेते हैं। जबकि 65 प्रतिशत से अधिक लोगों को अनियमित मल त्याग की समस्या है, जबकि 50 प्रतिशत से ज्यादा लोग सप्ताह में कम से कम तीन बार बाहर या पैकेज्ड भोजन करते हैं। केवल 45.2 प्रतिशत लोग नियमित व्यायाम करते हैं और लगभग 40 प्रतिशत युवा पाचन संबंधी लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं।
दिल्ली के आंकड़े और अधिक चिंताजनक हैं। यहां 89.5 प्रतिशत लोग बिना डॉक्टर की सलाह के दवाओं या जीवनशैली में बदलाव का सहारा लेते हैं। 65 प्रतिशत से अधिक लोग अनियमित मल त्याग से जूझ रहे हैं, जबकि 80 प्रतिशत से अधिक लोगों को मल त्याग के बाद भी पूरी तरह साफ न होने का अनुभव होता है। इसके अलावा 86 प्रतिशत लोग नियमित रूप से बाहर का भोजन करते हैं और केवल 35.5 प्रतिशत लोग ही नियमित व्यायाम करते हैं।
सर्वे में यह भी सामने आया कि समय की कमी (35.4 प्रतिशत), डर (31.1 प्रतिशत ), झिझक (17.9 प्रतिशत) और समस्या को गंभीर न मानना (15.7 प्रतिशत) जैसे कारणों से लोग समय पर डॉक्टर से परामर्श नहीं लेते।
विशेषज्ञों के अनुसार, कोलोरेक्टल कैंसर बड़ी आंत या मलाशय में विकसित होता है और अक्सर पॉलिप्स से शुरू होता है। इसके प्रमुख जोखिम कारकों में कम फाइबर वाला आहार, मोटापा, निष्क्रिय जीवनशैली और तंबाकू का सेवन शामिल हैं।
डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि मल में खून आना, मल त्याग की आदतों में बदलाव, पेट दर्द, थकान और बिना कारण वजन कम होना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच और इलाज से इस बीमारी को शुरुआती अवस्था में रोका और ठीक किया जा सकता है।
